Wednesday, 26 November 2014

श्रीमान मोदी जी ! आपके अच्छे दिन तो आ गए किन्तु कब और कैसे आएँगे जनता के अच्छे दिन ?

   मोदी जी! सरकार  की योजनाएँ सरकारी कर्मचारियों के आधीन हैं किंतु उन्हें काम करने की अब  आदत नहीं रही है इसलिए यदि कर्मचारी ही लापरवाह हों तो आखिर इन योजनाओं के लिए काम कौन करेगा और कैसे आएँगे अच्छे दिन ?  
  श्रीमान मोदी जी !जैसा कि सबको पता है कि सरकारी कर्मचारियों का बेतन तो सरकार देती है जबकि उन्हें  काम आम जनता का करना होता है किंतु आम लोग तो उन्हें सैलरी देते नहीं है फिर ऐसे कर्मचारी उनकी बात क्यों सुनें ? जनता भी अपना काम उनसे  किस हक़ या हनक से करवावे ! वो लोग काम करें या न करें पूर्ण रूप से स्वतंत्र होते हैं अब उनसे जिनको काम लेना है वे या तो उनसे हाथ पैर जोड़ कर अपना जरूरी काम करवावें या फिर घूस देकर ! 
    इसके अलावा चूँकि सरकार उनको सैलरी देती है इसलिए सरकार में सम्मिलित लोगों की और अपने से बड़े अफसरों की बात सुनना तो उन बेचारे कर्मचारियों की मजबूरी है क्योंकि वो अफसर उन पर कार्यवाही कर सकते हैं इसलिए उन अफसरों की आव भगत तो वो लोग किया करते हैं किन्तु आम जनता के हाथ में काम कराने के लिए घूस देने के अलावा ऐसे कोई अधिकार नहीं होते इसलिए सरकारी कर्मचारी उनकी बात  सुनते ही नहीं हैं ।
    मित्रो !हर विभाग में सरकार तो जा नहीं सकती, रही बात अफसरों की तो सरकारी तो वो भी हैं इसलिए  वातानुकूलित कमरों से निकलकर बाहर वो  क्यों जाएँ आखिर उनका क्या लाभ है !
   इसीलिए जो काम जितना अच्छा आठ दस हजार रूपए सैलरी देकर एक आम आदमी अपने कर्मचारियों से करवा लेता है वो काम पचास हजार से लेकर एक लाख का बेतन देकर भी सरकार नहीं करवा पाती है आखिर क्यों ? या यूँ कह लिया जाए कि कई विभागों में जिस काम को करने की सैलरी तो सरकारी कर्मचारी लेते हैं किन्तु उन्हीं विभागों का वही काम करते प्राइवेट कर्मचारी हैं !
     सरकार एवं सरकारी कर्मचारी एवं सरकारी स्कूलों के लोग अपने बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाते हैं आखिर क्यों ?इसका सीधा सा अर्थ है कि उन्हें सरकारी स्कूलों के काम काज पर भरोसा नहीं होता है और सरकारी कर्मचारी अपनी इस अकर्मण्यता को आभूषण मानते हैं !अन्यथा उन्होंने अब तक कुछ तो सुधार किया होता !
इसी प्रकार से सरकारी चिकित्सा पद्धति पर लोग भरोसा नहीं करते हैं चिकित्सा के लिए प्राइवेट नरसिंग होम में जाते हैं ! सरकारी फोनों पर भरोसा नहीं करते हैं प्राइवेट कंपनी के फोन रखते हैं यही डाक का हाल है पोस्ट आफिस की अपेक्षा कोरियर पर विश्वास अधिक करते हैं । 
     इसप्रकार से  सरकारी काम काज की पद्धति से तंग आकर शिक्षा ,चिकित्सा ,डाक,फोन आदि कई और भी विभागों से जुड़े काम इन्हीं विभागों से सम्बंधित प्राइवेट लोगों या कंपनियों से जनता करवा रही है इस प्रकार से अपनी सेवाओं के द्वारा आम लोगों का विश्वास सरकारी कर्मचारी न जीत पा रहे हैं और न जीतने का प्रयास ही कर रहे हैं और  यदि सरकारी काम काज का यही हाल है तो प्राइवेट विकल्प से विहीन पुलिस जैसे विभागों से असंतुष्ट जनता अपनी पीड़ा किससे कहे ? आज पुलिस से निराश लोग अपराधियों के संरक्षण में जीवन यापन करने पर मजबूर हो रहे हैं वो अपराधी या दबंग वर्ग उन्हें अभय दान दे रहा है और उनसे मासिक या साप्ताहिक वसूली कर रहा है । सरकार एवं सरकारी कर्मचारियों की ऐसी ही लापरवाही से दबंग वर्ग कालांतर में अलगाववादी उग्रवादी नक्सली आदि तो नहीं बन जाता है !अन्यथा उनके पास इतना धन कहाँ से आता है और क्यों मिलता जाता है भारी भरकम जन समर्थन ?

Tuesday, 25 November 2014

बाबाओं को केवल तीन लोग बर्बाद करते हैं ! "मंत्री,महात्मा और मीडिया

 बंधुओ !बाबाओं का राजनैतिकबर्चस्व,अकूतसंपत्ति,    आश्रमों का आतंक और  मिनिस्टर,मनीलेंडर और मीडिया  

 महिलाओं का यौन शोषण  बाबा के कमांडो किया करते थे।रामपाल के ‘सतलोक’ में गर्भपात का गोरखधंधा -amar ujaala   

  • "रामपाल जिस महिला को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद देता था उसकी अल्ट्रासाउंड से जांच आश्रम में ही करवाई जाती थी। जांच में यदि किसी महिला के गर्भ में कन्या भ्रूण होता था तो उसका गर्भपात करवा दिया जाता था और रामपाल कहता था कि अभी तुम्हारा समय सही नहीं है। तुम्हें एक बार और आशीर्वाद लेना पड़ेगा।"  

  • "जिनके दो से तीन बेटियां थीं। वह बाबा के पास इसी आस में आते थे कि बाबा उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान देंगे। दिल्ली निवासी अनुयायी ने बताया कि कई बार नए जोड़े भी बाबा के आश्रम में पहुंचते थे। किसी कारण से बच्चा न होने की परेशानी वह रामपाल को बताते थे। ऐसी महिलाओं का बाबा के कमांडो ही यौन शोषण करते थे।"

  •  "सतलोक आश्रम के अस्पताल में पिछले दो तीन दिनों से लगातार प्रिग्नेंसी टेस्ट किट, सेक्स वर्द्धक दवाइयां, महिलाओं से संबंधित कुछ बेनामी दवाइयां बरामद हो रही हैं। सोमवार को भी आश्रम से प्रिग्नेंसी टेस्ट की किटें बरामद हुई हैं। इसके साथ ही अस्पताल में बिना लाइसेंस के लगी अल्ट्रासाउंड मशीन भ्रूण जांच और गर्भपात के धंधे की ओर इशारा कर रही है।' 

     धर्म निरपेक्षता की पहचान -

       यदि आप हिंदूधर्म,हिन्दू धर्मशास्त्रों एवं हिंदूपरंपराओं का उपहास उड़ाते हैं, इनकी निंदा करते हैं इनसे घृणा करते हैं तो आप धर्म निरपेक्ष हैं !

    सांप्रदायिकता की पहचान- 
      यदि आप हिंदूधर्म,हिन्दू धर्मशास्त्रों एवं हिंदूपरंपराओं का उपहास नहीं उड़ाते हैं, इनकी निंदा नहीं करते हैं और इनसे घृणा नहीं करते हैं तो आप सांप्रदायिक हैं !
    अंधविश्वास -यदि आप भारत के प्राचीन ज्ञान विज्ञान पर आस्था रखते हैं ,भारत के प्राचीन संस्कारों के मूल्यों का

      हमसे ज्योतिष संबंधी परामर्श के लिए सुविधाएँ -

      बंधुओ ! ज्योतिषशास्त्र के विषय में सही एवं शास्त्रीय सलाह देना हमारा कर्तव्य है इसलिए आपसे निवेदन है कि कम्प्यूटर से बनी हुई जन्मपत्री का आधार गलत होने के कारण उसके आधार पर भविष्य नहीं बताया जा सकता है इस लिए ज्योतिष के विद्वान लोग कम्प्यूटराइज्ड कुंडली पर पूर्ण भरोसा कम करते हैं ! पंचांग पद्धति से बनी कुंडली ही विश्वसनीय मानते हैं वैसे जिनके पास जन्मपत्री न हो ऐसे लोग प्रश्नकुंडली भी दिखा सकते हैं। 

       किसी के भविष्य के अच्छे बुरे समयों की खोज करने के लिए कुंडली तो चाहिए ही और वो भी बिलकुल सही ! सही कुंडली विद्वान लोग बना सकते हैं विद्वान लोग दो तरह से पहचाने जा सकते हैं पहली बात जिनके विषय में आपका अनुभव ठीक हो या फिर किसी अच्छे विश्व विद्यालय से ज्योतिष सब्जेक्ट लेकर एम.ए.पी.एच.डी.आदि तक पढ़ाई की हो !

      

    बंधुओ ! ज्योतिष,वास्तु,कुंडली, नग नगीना यंत्र तंत्र ताबीज आदि धर्म एवं धर्म शास्त्र से जुड़े सभी क्षेत्रों में उनकी सच्चाई समझने एवं ज्योतिष शास्त्र के नाम पर  भी आजकल जो कुछ भी चल रहा है उसमें क्या सच है और क्या झूठ ! आदि सब कुछ समझने के लिए पढ़िए हमारा ब्लॉग 'ज्योतिष विज्ञान अनुसंधान'see more.... http://jyotishvigyananusandhan.blogspot.in/2014/11/blog-post_24.html 

      बंधुओ!अपने एवं अपने परिवार से जुड़े किसी भी विषय में ज्योतिषीय परामर्श के लिए किसी विद्वान ज्योतिष वैज्ञानिक की खोज में यदि आप भी हैं तो देखिए हमारा  यहलिंक उपयोगिता  - -http://jyotishvigyananusandhan.blogspot.in/p/blog-page_10.html

Monday, 24 November 2014

स्मृति ईरानी के राष्ट्रपति बनने सम्बन्धी भविष्यवाणी का ज्योतिषीय आधार आखिर क्या है ?

स्मृति ईरानी के राष्ट्रपति बनने सम्बन्धी भविष्यवाणी का ज्योतिषीय आधार आखिर क्या है ? 
   किसी ज्योतिषी के पास कोई नेता पहुँच जाए तो इतना हो हल्ला क्यों मच जाता है ?ज्योतिषी अछूत होते हैं क्या ?ज्योतिष से यदि अंधविश्वास फैलता है तो सरकार अपने संस्कृत विश्व विद्यालयों में पढ़वाने के लिए इतनी भारी धनराशि क्यों खर्च करती है ?जहाँ तक स्मृति ईरानी जी के विषय में उस ज्योतिषी का यह कहना कि वे भविष्य में राष्ट्रपति बनेंगी यह शुभ कामना हो सकता है कि साकार हो भी जाए किन्तु इतनी बात विश्वास से कही जा सकती है कि ऐसी बातों का ज्योतिष शास्त्र से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है फिर भी यदि कोई व्यक्ति अपनी ऐसी बातों का सम्बन्ध ज्योतिष शास्त्र से जोड़ना चाहे तो किसी भी मंच पर शास्त्रार्थ किया जा सकता है और यदि इस बात का ज्योतिष से कोई सम्बन्ध नहीं है वो कहते हैं की हमारी निजी बात है तो उसमें हमें कोई आपत्ति नहीं है ! वैसे ज्योतिष और ज्योतिषियों की सच्चाई समझना सरकार एवं समाज के लिए बहुत जरूरी है !ज्योतिष शास्त्र  को अच्छे ढंग से समझने के लिए पढ़िए हमारे ये लेख -  बंधुओ ! ज्योतिष शास्त्र बहुत सक्षम विज्ञान है  यह जीवन के कई क्षेत्रों में उतनी बड़ी मदद कर सकता है जितना कहीं और से संभव न हो !ज्योतिष शास्त्र जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण एवं उपयोगी विधा की उपेक्षा करना हानि कारक है और इसके प्रति अंधश्रद्धा रखना सबसे अधिक  खतरनाक है !इसलिए पहले ज्योतिष एवं ज्योतिषियों के प्रभाव को पढ़िए और समझिए साथ ही यह भी जानिए कि आपके see more...http://jyotishvigyananusandhan.blogspot.in/2014/11/blog-post_24.html
     भारत सरकार इतनी उदार ! कि सरकार आने के कुछ महीने पहले ही देश को बता दिया गया कि अच्छे दिन आने वाले हैं किंतु कब और कैसे ये दोनों प्रश्न लोगों के मन में कौतूहल पैदा कर रहे हैं आम समाज को आज तक ऐसा कोई हेल्प लाइन नंबर नहीं मिला जिसमें वो अपनी परेशानी बतावे और उस पर कार्यवाही हो और यदि कार्यवाही हो तो भ्रष्टाचारियों में भय भी होगा स्वाभाविक है किन्तु अभी तो बिलकुल उल्टा चल रहा है अभी अपने आस पास हो रहे किसी गलत काम की सूचना यदि कोई सरकार को मुहैया कराना चाहे तो चूँकि लगभग हर गलत काम उस विभाग के सरकारी कर्मचरियों के संरक्षण या जानकारी में चल रहा होता है जिसे वो सह रहे होते हैं -
              इस धैर्य के लिए उन्हें धन मिलता है !            
    
रोकने के लिए कोई कहीं शिकायत तो नहीं कर रहा है उसके नाम पता समेत सके विषय में कोई कार्यवाही तो नहीं

 see more...http://bharatjagrana.blogspot.in/2014/03/mcd.html


Sunday, 23 November 2014

श्री राम मंदिर निर्माण से सम्बंधित भविष्यवाणी कहीं झूठ न हो जाए !

   श्री राम मंदिर निर्माण मिल जुल कर प्राथमिकता पूर्वक अभी निकाल लेना चाहिए समाधान !फिर कहीं देर न हो जाए !

    बंधुओ ! पिछले वर्ष यह ज्योतिषीय भविष्यवाणी यह सोचकर की गई थी कि 19.6.2014 से  14.7.2015 तक श्री राम मंदिर निर्माण के लिए अत्यंत उत्तम ग्रहयोग है अर्थात इस समय मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा । इस पर आज कुछ लोगों का इस विषय में हमारे शास्त्रीय विचारों पर शंका करना स्वाभाविक ही है ।         बंधुओ! हमारी उस भविष्य वाणी का आधार ग्रहों की उत्तमता से लेना चाहिए हमारा अभिप्राय था कि जो भारतीय जनता पार्टी  श्री राम मंदिर बनवाना चाहती थी  2014 के चुनावों में उसकी विजय होगी इसलिए वह मंदिर बनवा देगी !बंधुओ !ग्रहयोग के प्रभाव से भाजपा की पूर्ण बहुमत से सरकार तो बनी किंतु उसके द्वारा श्री राम मंदिर बनाने के सम्बंध में अभी तक कोई कार्य योजना समाज़ के सामने नहीं आ पाई है! हो सकता है कि भाजपा के लोग इस विषय में कुछ बहुत अच्छा सोच रहे हों किन्तु कहीं ऐसा न हो कि सोचते सोचते ही वह महत्वपूर्ण समय निकल जाए ! क्योंकि यह इतना अच्छा समय 14.7.2015 तक ही है । 

   ज्योतिष शास्त्र के अनुशार यह एक वर्ष का समय है जब समाज सुखी प्रसन्न एवं सतोगुणी होता है इसीलिए भ्रष्टाचार पापाचार सभी प्रकार के पाखण्ड एवं पाखंडियों के विरुद्ध समाज सरकार एवं प्रशासन स्वयं उठ खड़ा होता है इस समय ऐसे ही दलों की सरकारें बनती हैं जो ईमानदारी पूर्वक देश एवं समाज के हित  में कुछ अच्छे कार्य करना चाहती हैं इसलिए इस समय विजयी होने वाले दलों को इस विजय का श्रेय स्वयं न लेकर समय की बलवत्ता को देना चाहिए अन्यथा आज के चार वर्ष बाद ग्रहों की चाल बदल चुकी होगी समय प्रभाव से परिस्थितियाँ भी स्वयमेव बदलती चली जाएँगी प्राकृतिक प्रकोप बढ़ेंगे जिससे वस्तुओं का अभाव होगा उस अभाव से समाज में आक्रोश एवं वैचारिक विषैलापन पैदा होगा ,परोक्ष रूप से जिसका सामना वर्तमान सरकार को ही करना होगा क्योंकि वही सत्ता में है उससे बचाव के प्रयास सरकार को अभी से करने चाहिए और जनता को जो आश्वासन एवं विश्वास देकर पार्टी सत्ता में आई है उसे न केवल पूरा करे अपितु पूरा करते दिखाई भी दे ताकि चार वर्ष बाद आने वाले प्रतिकूल समय में अभी के किए गए पवित्र आचरण उस समय उसकी ढाल बन सकें !

      रही बात श्री राम मंदिर बनाने की तो यह सतोगुणी समय श्री राममंदिर निर्माण के लिए अभी सर्वोत्तम है  इस समय इस दिशा में किए गए अल्प प्रयासों का आशा से अधिक परिणाम निकलेगा और शान्ति पूर्ण प्रयास भी सफल होंगें तथा श्री राम मंदिर निर्माण का कोई सर्वस्वीकृत मार्ग इस समय प्रशस्त हो सकता है यदि श्री राजनाथ सिंह जी को आगे करके कोई पहल न की जाए तो और अधिक आसान होगा !

       बंधुओ ! श्री राम मंदिर निर्माण की दिशा में सहयोगी यह समय (19.6.2014 से  14.7.2015तक)किसी कारण से अभी यदि निकल जाता है तो इस विषय में सहयोगी ऐसा उत्तम समय दस बारह वर्षों बाद फिर आएगा तब तक इस दिशा में की गई किसी भी पहल का सार्थक समाधान निकल  पाना कठिन होगा ऐसी परिस्थिति में इस दृष्टि से खाली हाथों ही अगले लोकसभा चुनावों का सामना  वर्तमान सरकारी पार्टी को करना होगा जहाँ, विरोधी पार्टियाँ ये कमजोर बातें जनता को बार बार याद दिलाएँगी  और जनता उन बातों पर विश्वास भी करेगी !क्योंकि समाज का चिंतन उस साय उतना सात्विक नहीं होगा इसलिए सरकार के द्वारा तब तक  किए गए परिश्रम पूर्ण विकास कार्यों की चमक जनता के मानस पटल पर तब तक धूमिल पड़ने लगेगी !तब इस विषय में जनता को अपनी कोई भी मजबूरी समझा पाना कठिन होगा !

    मित्रो ! श्री राम मंदिर निर्माण के विषय में लगभग एक वर्ष पहले की गई उस भविष्य वाणी को पढ़ने के लिए यह लिंक देखें -http://snvajpayee.blogspot.in/2013/02/blog-post_4187.html

Friday, 21 November 2014

'बाबा रामपाल 'की गिरफ़्तारी के ढंग से हमें तो नहीं लगता कि दाऊद जैसों को पकड़ पाना हमारे लिए आसान होगा !

     बंधुओ ! अमेरिका से हम कितना पीछे हैं ?  ओसामा बिन लादेन और बाबा रामपाल !

    एक ओर विश्व के मोस्टवांटेड आतंकवादी ओसामा को समुद्र पार करके किसी दूसरे देश से उठा ले जाना और उस देश को पता भी न लगने देना, एक चिड़िया तक न मरने देना !अपनी सारी रणनीति को गुप्त रख लेना ! वहीँ दूसरी ओर भारत में घोषित बाबा रामपाल अपने घोषित आवास में अपनों के साथ स्वाभाविक रूप से रह रहा था, वहाँ वो अपनी सहज प्रक्रिया के तहत लोगों की बड़ी संख्या के साथ साथ  बड़े हथियार इकठ्ठा करता रहा 15 दिनों तक शोर मचा रहा विश्व का सारा मीडिया देखता रहा कि हम कितने काबिल हैं हमारे पत्रकारों की पिटाई हुई बड़ी संख्या में हमारे पुलिस के जवान जख्मी हुए कुछ मौतें भी हुईं तब हम पकड़ पाए अपने एक बाबा को !जहाँ केंद्र से लेकर प्रान्त तक एक ही पार्टी की सक्षम सरकार है !आखिर किसी ऐसी विधा पर विचार क्यों नहीं किया जा सका जिससे बिना इतना शोर शराबा किए एवं अपने नागरिकों को सुरक्षित रखते हुए और पकड़ कर समय से कोर्ट के सामने उपस्थित कर पाते उस विवादित बाबा को ! 

     अब तो लोग कहने लगे हैं कि बातों में भले हम अमेरिका जैसे देशों से आगे हों ,भीड़ जूता कर अपनोंके बीच बड़ी बड़ी बातें कर लें अपनी पीठ थपथपाने को हमें कौन रोक सकता है ईश्वर ने हमें मुख दिया है किन्तु काम में हम कितने सुस्त एवं अदूरदर्शी हैं ये दुनियां देख कर हम पर क्या हँस नहीं रही होगी!

Wednesday, 19 November 2014

आश्रमों ,संतों एवं शास्त्रों की मर्यादा की रक्षा के लिए शास्त्रीय संत आगे आएँ !

      नेताओं , भोगियों ,भिखारियों और व्यापारियों को संत एवं उनके कार्यस्थलों को आश्रम न कहा जाए ! मीडिया भी निभाए इतनी भूमिका !ऐसे लोग संत वेष  में ही क्यों न हों तो भी उनके साथ आम जनता जैसा व्यवहार ही  होना चाहिए !

संतों के वेष में छिपे नेता लोग -

   नेतागिरी करने की उत्कट इच्छा को पूरा करने के लिए कुछ लोग बाया सधुअई  नेता बनते हैं अर्थात पहले साधू बनकर धन संग्रह करते हैं समाज में विश्वास जमाते हैं ऐसा भी कहा जा सकता है कि नेता बनने के लिए सधुअई का इस्तेमाल करते हैं इनके रहन सहन आचार व्यवहार आदि में धर्म कर्म पूजा पाठ आदि के कोई  लक्षण नहीं होते हैं । ये धार्मिक बातों की अपेक्षा हमेंशा सामाजिक एवं राजनैतिक बातों विचारों में ही रूचि लेते हैं पूर्व संचित पापों के कारण इनका मन पूजा पाठ में नहीं लगता है ऐसे लोग साधुओं जैसा वेष  धारण करके हर समय झूठ साँच धोखा धड़ी आदि व्यवहारों से उतना बच नहीं पाते हैं।

      नेता बनने के लिए इन्हें पहले साधू क्यों बनाना पड़ता है ?

   सधुअई  से  एक सबसे बड़ा लाभ ये होता है कि ऐसे लोग साधुवेष  में होने के कारण धर्म या समाज के नाम पर कभी भी किसी से भी कुछ भी माँग लेते हैं वो भी ऐसा जो कभी वापस देना न पड़े !दूसरा इस वेष में राजनैतिक दृष्टि से बड़े से बड़े नेता से मिलने पहुँच सकते हैं साधुवेष  के प्रति आदर होने के कारण वो मना भी नहीं कर सकते !समाज के इसी साधुवेष पर भरोसे को कैस करते हुए चुनाव भी लड़ लेते हैं और जीत भी जाते हैं !

      शंका -इतने सारे प्रपंचों में फँसे हुए मन वाले लोग अपने अपने धर्मों सम्प्रदायों के आत्म संयम इंद्रिय निग्रह जैसे कठोर व्रतों एवं धर्मकर्म का निर्वाह कैसे कर पाते होंगें ये लोग !दूसरा यदि यही सबकुछ करना था तो साधुत्व को सुरक्षित बना रहने देते बाकी जो मन आता सो करते आखिर कौन रोक रहा था ?

  संतों में छिपे व्यापारी लोग -

       व्यापार करने के लिए धन चाहिए यदि अपने पास धन न हो तो उधार लेकर व्यापार में लगाना पड़ेगा उधार देने वाला कुछ गिरवी रखने के लिए माँगेगा ऊपर से व्याज लेगा और जमा भी लेगा ये निश्चित है किन्तु व्यापार में लाभ ही होगा ये निश्चित नहीं है ऐसे में किसी को वह धन लौटाया कब और कैसे जाएगा और बिना इसकी स्योरिटी के कोई कर्जा क्यों देगा !

      ऐसी परिस्थिति में बिना इनसारे झंझटों में पड़े ही एक झटके में सधुअई धारण करके बिना किसी बड़े संसाधन के बड़ा से बड़ा व्यापार फैलाया जा सकता है यदि उस व्यापार में कुछ धर्मकर्म ,स्वदेशी आदि पुट लग जाए तो सोने में सोहागा कहीं तक कितना भी धन बढ़ाते चले जाओ और धन के साथ साथ सारी  सुख सुविधाएँ बढ़ती  स्वयं  चली  जाती हैं और धन होने के बाद आप कभी भी कुछ भी बन सकते हैं !  


संतों में छिपे भोगी अर्थात कामी लोग -

    अच्छी अच्छी स्त्रियों से अमर्यादित रूप से जुड़ने भोगने की भावना पूर्ति को अंजाम देने के लिए बाया  सधुअई भी एक रास्ता जाता है सृष्टि का सिद्धांत है कि जो स्त्री सुन्दर  होती है उसके पति सुख में बाधा होती है

     या सुंदरी सा पतिना विहीना यस्याः पतिः सा बनिता कुरूपा !

     ऐसी महिलाएँ अपनी सुंदरता के घमंड में ऐसे होटलनुमा आश्रमों के सहारे अपनी गृहस्थी को चौपट कर लेती हैं और अपने अनुकूल पुरुष की तलाश में कई जगह धोखा खाकर इस संसार से निराश हताश होकर विरक्ति की ओर बढ़ने लगती हैं जिसके लिए वो आश्रमों में चक्कर लगाती हैं वहाँ यदि कोई संत हुआ तो समझा  बुझाकर वापस घर लौटा देता है और यदि कोई कामी हुआ तो उसे अपने पास रख लेता है जहाँ उनका वास्तविक शोषण होता है ऐसे प्रकरणों में कई बार संतानें तक होते देखी गई हैं और ऐसी महिलाएँ उस होटलनुमा आश्रम में आने जाने वालों के लिए रौनक भर बन कर रह जाती हैं ! जहाँ सुख सुविधाओं के नाम पर उन्हें मिलता तो सबकुछ है किन्तु सब  कुछ गँवा कर !ऐसी महिलाएँ देखने में तो बहुत खुश होती हैं किन्तु उनकी अंतर्पीड़ा  असह्य होती है और भयंकर पश्चाताप से जूझ रही होती हैं वे !ऐसी महिलाओं का जमावड़ा जैसे जैसे वहाँ बढ़ने लगता है वैसे वैसे वहाँ आने जाने टिकने ठहरने रहने वाले धनदाताओं की भीड़ें भी बढ़ने लगती हैं इस प्रकार  से सबकुछ मिल जुलकर उन होटलनुमा आश्रमों का वातावरण बिलकुल स्वर्ग जैसा दिखाई पड़ता है जहाँ कितने भी कैसे भी कर्म  कुकर्म  क्यों न हों किन्तु आश्रमनाम सुनते ही शिर श्रद्धा से झुक जाता है ये हम लोगों का अपना संस्कार ही है । 

       इस समय आश्रमों और सधुअई की आड़ में बहुत कुछ वो हो रहा है जो घोर निंदनीय है किन्तु कहे कौन बहुत पापप्रिय बाबाओं ने सत्ता में ऐसी जड़ें जमा रखी हैं कि उस प्रभाव से चरित्रवान भले साधू संतों का जीना मुश्किल कर देते हैं और कर्म खुद गलत करते हैं और सिक्योरिटी सरकार से माँगते हैं । संत वेष धारण करके जो लोग व्यापार या राजनीति करते हैं तो बुराई भलाई तो होती ही है कोई किसी की बहन बेटी को छेड़े या किसी को गाली गलौच दे और जब अपनी बारी आवे तो सिक्योरिटी माँगता फिरै ये कैसा साधुत्व ?साधू संत तो जंगल में हिंसक जीव जंतुओं के बीच रहकर भी सुरक्षित होते थे और यदि मर जाएँ तो मर जाएँ किंतु उन्हें मरने का भय नहीं होता था वो चरित्रवान संत होते थे ,वो योगी होते थे उन्होंने योगिक क्रियाओं  के द्वारा अपने शरीरों को बज्र बना रखा होता था जिनके शरीरों पर अस्त्र शस्त्रों का असर ही नहीं होता था किंतु वो योगी होते थे आजकल तो हर कोई योगी है जिसे दमा या स्वाँस रोग हो वो तो स्वाभाविक योगी है वो तो सहज प्राणायामी  होता है !

   जो भी बाबा लोग धर्म कर्म से अलग हटकर सांसारिक प्रपंचों में पड़े हुए हैं या व्यापार धंधे में लगे हुए हैं या धन संग्रह में लगे हुए हैं या सांसारिक सुख सुविधाएँ जुटाने में लगे हुए हैं या या आश्रमों के नाम पर होटलों का निर्माण कर रहे हैं उनका रहना खाना पीना सब कुछ गृहस्थों की तरह ही है जहाँ धर्म कर्म की कोई विशेष गतिविधि दिखाई सुनाई नहीं पड़ती या ये सबकुछ केवल दिखाने सुनाने के लिए होता है बाक़ी अंदर की जिंदगी पूरी तरह धार्मिक गति विधियों से विमुख और व्यापारिक या राजनैतिक गतिविधियों से ओत  प्रोत होता है ।ऐसे लोगों को संत कैसे कहा जाए !