भाग्य से ज्यादा और समय से पहले किसी को न सफलता मिलती है और न ही सुख ! विवाह, विद्या ,मकान, दुकान ,व्यापार, परिवार, पद, प्रतिष्ठा,संतान आदि का सुख हर कोई अच्छा से अच्छा चाहता है किंतु मिलता उसे उतना ही है जितना उसके भाग्य में होता है और तभी मिलता है जब जो सुख मिलने का समय आता है अन्यथा कितना भी प्रयास करे सफलता नहीं मिलती है ! ऋतुएँ भी समय से ही फल देती हैं इसलिए अपने भाग्य और समय की सही जानकारी प्रत्येक व्यक्ति को रखनी चाहिए |एक बार अवश्य देखिए -http://www.drsnvajpayee.com/
Monday, 9 February 2015
Friday, 6 February 2015
साधुओं जैसी शकल न अकल और न ही नक़ल फिर भी साधू ! कितना बड़ा चमत्कार है !
सधुअई एक खोज !आखिर सधुअई है क्या और साधू बनना जरूरी है क्यों ?
हाईटेक बाबाओं ने समाज को भ्रमित किया है !इनका कोई नियम धर्म ही नहीं होता है जो मन आता है सो बकने बयाने या करने लगते हैं उसी को धर्म बता देते हैं !
किसी लड़की को छेड़ा तो बोले कृष्ण जी भी तो यही करते थे । अपने हर प्रकार के पाप साबित करने के लिए पुराणों की कथाओं को अपने अपने अनुशार फिट करने के लिए गढ़ छोल कर तैयार कर रखा है जहाँ जब जरूरत पड़ती तहाँ तब फिट कर देते हैं ।
नाचें गावें , व्यापार करें ,कुश्ती लड़ें ,चुनाव लड़ें किसी को मारें गरियावें आदि वो भी सबकुछ करें जो नहीं करना चाहिए !झूठ बोलने से लेकर ऐसा कोई पाप नहीं जिसे करने में ये भय मानते हों फिर भी साधू हैं इनकी नजर में सधुअई आखिर है क्या ?
आधुनिक बाबाओं के विषय में समाज कन्फ्यूज्ड है कि आखिर उन्हें क्या माने !और क्यों मानें ?और न ही ये पता लगता है कि इन बेचारे बाबाओं की ऐसी मजबूरी आखिर क्या थी क्यों बनाना पड़ा इन्हें बाबा!ऐसे बाबाओं को साधू संत मानने का दंड न जाने क्यों भोग रहा है सनातन धर्मी समाज !
आधुनिक बाबाओं के किसी भी आचरण में धर्म कर्म के लक्षणों के नाम पर केवल वेषभूषा ही दिखाई पड़ती है बाक़ी सारे लक्षण एक मजे हुए राजनेता की तरह ,व्यापारी की तरह,हीरो की तरह ,गायक की तरह पहलवान की तरह आदि सब तरह के होते हैं किन्तु इनके किसी आचरण से ईश्वर भक्त साधुओं की सी सुगंध नहीं आती है किन्तु बातें उन्हीं की तरह की करते हैं ।
शेर की खाल ओढ़ कर रहने वाला कोई गधा जैसे अपने गधों की टोली देखता है तो चींपों चींपों करने लग जाता है क्योंकि किसी का स्वभाव बदलता तो है नहीं इसीलिए ऐसे हाईटेक लोग भी वैसे तो साधुओं जैसे वस्त्रों में अपने शरीरों को लिपेट कर रखते हैं किन्तु चुनाव पास देखते ही कहीं किसी नेता के साथ चिपक जाते हैं तो कहीं किसी पार्टी के साथ बस उसी के लिए चींपों चींपों करने लग जाते हैं ।
बंधुओ ! जो विरक्त साधू संत होते हैं उन्हें न सत्ता की जरूरत और न ही संम्पति की वो तो स्वयं में राजा होते हैं किन्तु आधुनिक बाबा चुनाव देखते ही औकात से उतरने लगते हैं बाबाओं का मानना होता है कि सरकारों के साथ चिपकना ही ठीक रहेगा उसी के संरक्षण में रहने में भलाई है इससे किसी भी परिस्थिति में कानून से भय नहीं रहेगा ,कैसा भी व्यापार कारोबार करो कोई जाँच पड़ताल नहीं होगी ,कुछ भी करो किसी को कुछ भी बको सिक्योरिटी की जिम्मेदारी तो सरकार उठाएगी ही ऊपर से सरकार में दखलंदाजी भी बनी रहेगी जिससे चेलाही में बढ़ोत्तरी होगी !
इनके अनुयायी चेला चेलियों की संख्या देखकर लगता है कि महँगाई के इस युग में ईमानदारी पूर्वक रोजी रोटी कमाने वालों के पास इतना समय कहाँ होता है कि वे ऐसे किसी के पीछे भीड़ बढ़ाते घूमें !इनका सारा समय अपना घरगृहस्थी ही सँवारते सुधारते बच्चों का पालन पोषण करते बीत जाता है हाँ जिन्होंने अपनी गृहस्थी न बनाई हो या बनाकर विसर्जित कर दी हो ऐसे लोगों की तो बात ही और है बाक़ी भले लोग कहीं सत्संग सुनने जाते हैं सुनकर अपने घर आते हैं वो बाबाओं से राजनीति की सलाह लेने तो नहीं ही जाते हैं किन्तु वे आदत से मजबूर हैं जो दे रहे हैं !
खैर, जो भी हो किन्तु धर्म क्षेत्र के इन घुसपैठियों ने अपने प्रयासों से अब धर्म को धर्म कहलाने का हकदार तो नहीं ही छोड़ा है बाक़ी जिम्मेदारी शास्त्रीय साधू संतों पर है कि वे अपने धर्म के शास्त्रीय मूल्यों को कितना और कैसे बचा पाते हैं !
बारे जीतन राम माँझी साहब !वाह कमाल कर दिया !!कैसे माना जा सकता है कि दलितों का शोषण कर पाया होगा कभी कोई !!!
मनुस्मृति को गलत बताने वालों को भी माँझी जी ने समझा दिया कि मनुस्मृति की बातें गलत नहीं हो सकतीं किसी को समझ में भले ही देर से आवें !मनुस्मृति को कोसने वाले अब भोगें ! भाजपा ने यू. पी.में भोगा था अब जदयू वाले भोगें बिहार में !
अब तो मनुस्मृति उन्हें भी समझ में आ गई होगी जो आज तक महर्षि मनु को ही दोष देते रहते ! अब एक बात सबको समझ आ जानी चाहिए कि मांझी ने नितीश कुमार और अपनी पार्टी के द्वारा किए गए विश्वास का जिस प्रकार से मजाक उड़ाया है धोखा दिया है उन्होंने , उससे अब कोई उनके पास भी नहीं खड़े होगा तब चिल्लाते घूमेंगे कि हमें दलित होने के कारण लोग छूना नहीं चाहते हैं !हमारे कहने का मतलब हर जाति से नहीं जोड़ा जा सकता !तुम किसी को धोखा देते रहो तो चालाकी या राजनीति और तुम्हें कोई देने लगे तो दलित होने का आरोप मढने लगो !ये कौन सी बात है ?
नितीश और लालू जैसे लोग जो जातिवादी राजनीति के विरोध में खड़े होकर बड़े बड़े भाषण देते थे ।आज भोग रहे हैं वही ! वारे माँझी साहब ! जो विश्वास करे उसी को डस लो बड़ी अच्छी राजनीति करते हैं आप !दूसरा कोई करे तो जातियों के नाम पर छाती कूटना !जब मांझी सवर्णों की निंदा करते रहे तब जनतादल यूनाइटेड का नेतृत्व मौन सुनता रहा और जब उसे डसना शुरू किया तब हाय तोबा क्यों ?
मांझी भाई! अब हम भी आपके साथ हैं आप खूब सवर्णों को दोषी ठहराइए और आप ऐसे ही उन्हें सबक सिखाइए !धन्य हैं आप !यू. पी.भाजपा को भी ऐसे ही सबक सिखाया गया था तब से आजतक नहीं जीत पाए चुनाव ! निकले थे मनुस्मृति को झुठलाने खुद पड़गए 99 के चक्कर में !
माँझी साहब !ब्राह्मणों और सवर्णों को गाली देना आसान है किन्तु कभी कभी आत्मचिंतन और मंथन करना भी आवश्यक होता है कि आज जिसने विश्वास किया यदि उसकी रक्षा नहीं हो सकी तो कल कौन करेगा विश्वास ! हर अच्छाई बुराई में जातियाँ ही मत खोजा कीजिए किसी व्यक्ति का सम्मान और अपमान उसकी जातियों से नहीं अपितु आचरणों गुणों और दुर्गुणों से होता है पार्टी के विश्वास की रक्षा की जानी चाहिए और कुछ हो या न हो कम से काम पार्टी के अंदर की बातों का मीडिया आना बिलकुल अविश्वसनीयता को बढ़ावा देना है !see more... http://samayvigyan.blogspot.in/2014/12/blog-post_27.html
Thursday, 5 February 2015
मोदी जी कोट नहीं तो क्या लँगोट पहनकर बैठ जाते ओबामा के सामने !आखिर क्यों उठाए जा रहे हैं कोट पर प्रश्न ?
मोदी जी आज देश के प्रधानमंत्री हैं इस गौरव की रक्षा भी उन्हें करनी थी!
एक ओर अपने देश में 26 जनवरी जैसे महान पर्व को मनाने का हर्षोल्लास पूर्ण माहौल था जिसमें मोदी जी के आमंत्रण पर विश्व का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक हजारों करोड़ खर्च करके आ रहा था तो दूसरी ओर ऐसे अतिथि का स्वागत करने की जिम्मेदारी हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी पर थी आज वो चाय बेचने वाले मोदी जी नहीं थे आज वो सवा सौ करोड़ भारतीयों के गौरवपुंज प्रधानमंत्री हैं और जब बात भारतीय प्रधानमंत्री की हो तो क्या देशवासी अपने प्रधान मंत्री दस लाख का सूट भी नहीं पहना सकते ! और यदि हम ऐसी ही दरिद्रता धारण करते रहे तो फिर विदेशों से सम्मान पाने की लालषा क्यों ! हमारे देश के मंत्री ,अभिनेता आदि सम्माननीय लोगों की भी तलाशी ली जाती रही है विदेशों में ! और हम केवल नाराजगी जता कर चुप बैठ जाते रहे, क्या हमें इससे ऊपर उठने का प्रयास नहीं करना चाहिए !और यदि वास्तव में दुनियाँ के सामने हमें भी अपना वजूद बना और बचा कर रखना है तो ऐसे नहीं चलेगा कि हमारे राष्ट्र के पर्व में सम्मिलित होने के लिए आनेवाला अतिथि तो हजारों करोड़ खर्च करके आ रहा है और हमारे प्रधान मंत्री जी लँगोटी लगाकर बैठ जाएँ !आखिर ऐसे मेहमान को भी अपनी जनता को जवाब देना होता होगा कि देश का इतना धन खर्च करके आप गए तो आपका स्वागत कैसा हुआ और स्वागत इससे भी आँका जाता है कि उस देश और देश के प्रधान मंत्री में आपको लेकर उत्साह कैसा था !ऐसे तो बेगानी शादी में अब्दुल्ला दिवाना !ऐसे कहीं बात बनती है क्या ?
अब बात दस लाख के शूट की -
महँगाई के इस समय में शादी समारोहों के समय दूल्हा और दुलहन को सजाने सँवारने में लाखों रूपए खर्च हो जाते हैं क्या हमारे प्रधानमंत्री की इतनी भी हैसियत नहीं होनी चाहिए! प्रधान मंत्री जी यदि गरीबों के प्रतिनिधि हैं तो रईसों के प्रतिनिधि भी तो वही हैं । यदि वो पहले कभी चाय बेचते रहे तो इतने लंबे समय तक प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे हैं !दूसरी बात जबतक चाय बेचते रहे तब तक तो नहीं पहना दस लाख का कोट जब प्रधानमंत्री बने तब पहना है वो भी केवल प्रधानमंत्री होने के कारण नहीं पहना है अपितु अतिथि का स्वागत करने के लिए पहना था दस लाख का कोट न कि अपनी शौक के लिए ! वो भी विशेष अवसर पर पहना था वो तथाकथित दस लाख का कोट !
राहुल गाँधी जी ऐसा क्यों सोचते हैं कि मोदी जी उनसे पूछकर पहनते कोट !
सुना जाता है कि मनमोहन सिंह जी पर इनका ऐसा ही दबाव था इसीलिए तो लोग मजाक करते थे कि मनमोहनसिंह जी आज किस रंग की पगड़ी पहनें यह भी यही लोग डिसाइड करते हैं खैर ऐसा हो या न हो किन्तु ऐसा तो जरूर था कि इनकी आज्ञा लिए बिना बनाया गया बिल इन्होंने फाड़ दिया था ये तो सारी दुनियाँ ने देखा है और बेचारे मनमोहन सिंह जी की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी आखिर क्या बीती होगी उन पर ! राहुल कितने छोटे हैं उनसे और वो योग्यता ,अनुभव आदि में भी राहुल से बहुत आगे हैं और यह निर्णय उनके मंत्रिमंडल का था फिर भी यदि कोई बात कहनी भी थी तो उनसे विनम्रता पूर्वक भी कही जा सकती थी इससे इज्जत नहीं घट जाती ! और आज ऐसी आज्ञाकारिता की उम्मींद उन्हें मोदी जी से नहीं करनी चाहिए।मोदी जी स्वतंत्र भारत के स्वतन्त्र प्रधान मंत्री हैं । ये अधिकार उन्हें देश की जनता ने दिया और उन्हें जवाब भी देश की जनता को देना होगा तो वो दे लेंगे ।
आम आदमी पार्टी को भी अखरा मोदी का दस लाख का कोट !आखिर क्यों?
मोदी जी को उस समय उस विषय में जो उचित लगा उन्होंने वो किया इसके लिए आम आदमी पार्टी क्या चाहती है कि कोट के विषय में मोदी जी पहले जनमत संग्रह कराते बाद में कोट पहनते तब तक ओबामा चले जाते !जनमत संग्रह भी आप वालों का इनके हिसाब का ही होता है जो करना होता है वो पहले करके रख लेते हैं बाद में उसी विषय में जनमत संग्रह करने का नाटक करते हैं।
मोदी जी के कोट पर प्रश्न-
कुलमिलाकर मोदी जी के कोट पर प्रश्न उठने बंद होने चाहिए अन्यथा अमेरिकी क्या सोचेंगे कि गणतंत्र दिवस भारत में था वहाँ जाने में हजारों करोड़ हमने खर्च कर दिए उसका कुछ नहीं दसलाख का कोट वहाँ के प्रधान मंत्री ने पहन लिया तो भारतीय लोग आजतक रो पीट रहे हैं !
Monday, 2 February 2015
मोदी जी ! नसीब अर्थात भाग्य बहुत कुछ है लेकिन सबकुछ नहीं है !
भाग्यवश रहते हैं बश दीन । वीर करते हैं उसे अधीन ॥
मोदी जी ! इन चुनावों में आपके भाग्यपर केजरीवाल का भाग्य भारी पड़ता दिख रहा है और यदि ऐसा हुआ तो उ.प्र. और बिहार का क्या होगा !सामाजिक संकेत अच्छे नहीं हैं आप बहुत बड़े इंतिजामी हैं बहुत कुछ करते दिख भी रहे हैं किन्तु जनता को जिन समस्याओं से रोज जूझना पड़ रहा है वहाँ तक आप पहुँच नहीं पा रहे हैं जहाँ तक रही बात काम की तो अटल जी ने कम काम नहीं किया था किन्तु इन्हीं कारणों से उसके बाद वाले चुनावों में राजग सत्ता में नहीं आ सका था !मोदी जी !जनता ने आपको पाँच वर्ष दिए थे जिसमें लगभग एक वर्ष आप खर्च कर चुके हैं उसके बदले जनता को क्या मिला जो उसे भी लगे कि हाँ मिला !सरकारी स्कूलों और अस्पतालों में केवल साफ सफाई से रहने के या डेंगू मच्छर बने हुए कुछ पोस्टर और लगा दिए गए हैं इसके अलावा और क्या हुआ !वहाँ की शिक्षा और चिकित्सा पद्धति में किसी प्रकार से कोई परिवर्तन नहीं हुआ है ।
अभी नसीब आपके साथ है तो आपका यशोविस्तार होता जा रहा है ज्योतिषी होने के नाते मैं कह सकता हूँ कि जुलाई 2015 से समय का सहयोग दिनोदिन घटने लगेगा जो अवरोही क्रम में 2019 तक जाएगा तब प्रकृति विप्लव होने के कारण समाज के अपने प्रयास दिनोंदिन असफल होते चले जाएँगे आवश्यकताएँ बढ़ेंगी उसकी आपूर्ति के अधिकांश प्रयास निरर्थक होने के कारण वे उनकी आपूर्ति के लिए सरकार पर निर्भर होते चले जाएँगे चूँकि चारों ओर की यही स्थिति होगी इसलिए चाह कर भी सरकार का लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरपाना कठिन होता जाएगा तब हिन्दू मुद्दे ढोने वाले लोगों को भी अपना वजूद बनाए एवं बचाए रखने के लिये सरकार की आलोचनाएं खुल कर करने लगेंगे लोकप्रियता के दिनोंदिन गिरते ग्राफ से आहत सरकार के समर्थक लोग भी कमियाँ निकालने लगेंगे 2017 के बाद कभी भी काँग्रेस प्रियंका को चुनाव में सक्रिय रूप में उतार सकती है जिसकी सम्मोहकता में सभी दबे कुचले दल इकट्ठे हो जाएँगे ।
इन सभी बातों के लिए अभी से गंभीर प्रयास करके शीघ्रातिशीघ्र ऐसा कुछ करने की चुनौती सरकार के सामने है जिससे जनता से आवाज उठे कि पहली सरकारों की अपेक्षा इस सरकार में ये अलग से परिवर्तन हुआ है बाक़ी अभी तक की सारी कवायद उस रामदल के तरह की है जब लंकाविजय करने के बाद मिली विजय को श्री राम लक्ष्मण जी तो पचा पा रहे थे बाक़ी बन्दर भालुओं ने खुशी खुशी में लोगों का जीना मुश्किल कर रखा था वही स्थिति इस समय सरकार समर्थक नेताओं की है!वो गैर जरूरी बयानों में बिजी हैं जरूरी कार्यों की ओर उनका ध्यान ही नहीं है ।
अस्तु !मेरा निवेदन आप से है कि कुछ ऐसा कीजिए जिससे सरकार के साथ साथ समाज को भी तुरंत लगे कि सरकार कुछ कर भी रही है जैसे केजरीवाल के समय में छोटे मोटे काम करने वालों से पुलिस की वसूली लगभग बंद हो गई थी इस सुखानुभूति को याद करके केजरीवाल के पीछे वो आज भी लगे हुए हैं जबकि इस समय ऐसा नहीं हो पा रहा है यहाँ तक कि दिल्ली जैसे सतर्क शहरों में भाजपाई नगर निगम तक पर लगाम नहीं लगाई है वहाँ किसी शिकायत की कोई जवाब देही नहीं है जिसका दुष्परिणाम है कि निगम भ्रष्टाचारों में भाजपा सम्मिलित है जनता को या समझाने में केजरीवाल कामयाब होते दिख रहे हैं ।
भाजपा का ध्यान इन गड़बड़ियों को सुधारने की और तो जा नहीं रहा है प्रत्युत किरणवेदी को ले आना ,बड़े बड़े सांसदों मंत्रियों को उतार देना बाहर से बुलाकर लगा देना किन्तु वो प्रचार आखिर का करें उसके लिए कुछ काम भी तो ऐसे किए गए हों जिनका प्रचार किया जाए !आखिर किस बात का प्रचार करें वे !
नरेंद्र मोदी जी ! सब कुछ करना देशवासी यह समझकर सह जाएँगे कि अपने मोदी जी कर रहे हैं तो अच्छा ही होगा ! किन्तु इसकी इतनी सीमा जरूर बनाए रखना कि भारतीय जनता का आप पर बना विश्वास बचा रहे ! क्योंकि विश्वास टूटते ही आदमी केजरीवाल हो जाता है !यदि किसी मजबूरी से विश्वास बचते न दिखे तो देस वासियों को बता जरूर देना कि अब मैं विवश हूँ शायद तब भी आपके प्रिय देशवासी आपको क्षमा कर दें किन्तु विश्वास मत तोड़ देना जो आपके सारे जीवन की साधना है और देश वासियों की महान संपत्ति है !आपके प्रिय देशवासी कभी अगर यह सुनेंगे कि मोदी जी अपने मुद्दों से भटक गए हैं या बदल गए हैं या सत्ता लोलुप हो गए हैं तो सह नहीं पाएँगे !
इस विषय में " स्वामी अखंडानंद जी ने भक्ति सूत्र की टीका करते हुए लिखा है कि "किसी जंगल में एक पेड़ के नीचे एक व्यक्ति अपने मित्र की गोद में शिर रख कर सो रहा था इसी बीच एक सर्प उस सोते हुए व्यक्ति को काटने आया तो मित्र के मना करने पर सर्प ने कहा कि इसने पूर्व जन्म में मुझे मारा था इसलिए मैंने इसके गले का रक्त पीने की प्रतिज्ञा की है यदि आप इसके गले का रक्त हमें वैसे ही दे दें तो मैं इसे नहीं काटूँगा तो मित्र ने कहा कि ठीक है और उसने चाकू से हल्का सा कट मार कर सर्प को रक्त दे दिया सर्प चला गया किन्तु इससे वह सोता हुआ मित्र जाग गया देखा कि मित्र के हाथ में चाकू है और चाकू में खून लगा हुआ है उसने गले को काटा है उससे खून बह रहा है यह सब कुछ देख कर वह फिर सो गया तो जिसकी गोद में लेटा था उसे बड़ा आश्चर्य हुआ उसने पूछा तक नहीं कि क्या हुआ है !तो उसने अपने मित्र को फिर से जगाया और पूछा कि तुमने देखा कि तुम्हारा गला काटा गया है और मित्र के हाथ में चाकू है और चाकू में खून लगा हुआ है गले से खून बह रहा है यह सब कुछ देख कर भी तू सो गया क्यों ? तुझे कुछ पूछना नहीं चाहिए था क्या तो उसने हँसते हुए कहा कि मित्र यह सब कुछ तो डरावना था किन्तु चाकू मित्र के हाथ में था बस इसी विश्वास पर निश्चिन्त होकर दुबारा सो गया था कि मित्र से अनिष्ट नहीं हो सकता !"
मोदी जी !चुनावों के समय आपके मुख से जनता ने महँगाई को भगाने की बात सुनी है किन्तु अब रेल किराया बढ़ाने की बात !कुछ कीजिए और बचा लीजिए भाजपा पर किए गए जनता के भारी विश्वास को ,यही परीक्षा की घड़ी है जिसमें केजरीवाल जनता का विश्वास बचा पाने में असफल रहे जिसकी भरपाई वो आज तक नहीं कर सके हैं इसलिए दूसरे कई काम रोककर महँगाई पर शीघ्र नियंत्रण बहुत आवश्यक है ।
मोदी जी जरा सँभल के ! देश बड़ी आशा से आपकी ओर देख रहा है उस विश्वास को बचा कर रखना बहुत बहुत कठिन एवं बहुत जरूरी है !
आज विवादित बयान भाजपा के लोग दे रहे हैं जिन्हें शांतिपूर्ण ढंग से सरकार चलाने की जिम्मेदारी जनता ने सौंपी है इस समय जो भी विवाद बढ़ेगा माना कि पूर्ण बहुमत की सरकार है गिरेगी नहीं किन्तु हमें याद ये भी रखना चाहिए कि विवादित बयानों की तलाश में खाली बैठे विपक्ष को हर विवादित बयान अमृत जैसा लगता है जिसके सहारे वो सरकार का समय नष्ट करने में सफल हो जाता है !क्या भाजपा को भी इसकी चिंता नहीं होनी चाहिए !
मोदी सरकार बने 6 महीने बीत चुके हैं इस कार्यकाल के मात्र साढ़े चार वर्ष बचे हैं किंतु मेरी समझ में कोई काम अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है जो सरकारी आंकड़ों से अलग जनता के जीवन को सरल कर सका हो ! डीजल तेल की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय बाजार से गिरी हैं उसमें सरकार तटस्थ है किन्तु तेल की कीमतों के गिरने के साथ जिन अन्य वस्तुओं की कीमतें जिस तरह से गिरनी चाहिए वैसी नहीं गिर सकी हैं सरकार की भूमिका यहाँ ठीक नहीं है, सब्जियों का प्रमुख सीजन होने के कारण उनकी कीमतें घटनी स्वाभाविक ही हैं इससे मोदी सरकार को सँभलने का मौका मिल गया है यह है दूसरी बात जनता के मन में अभी भी U.P.A. के प्रति आक्रोश थमा नहीं है प्रदेशों में भाजपा की बढ़ती विजय का प्रमुख कारण वही है इसलिए अभी तक जनता भाजपा से हिसाब नहीं माँग रही है जब माँगेगी तो बाबा जी की सिक्योरिटी के आलावा ऐसा क्या बताया जाएगा जो जनता के जीवन से जुड़ा हो उसमे भी सिक्योरिटी केवल बाबा जी की ही क्यों ?उन्हें इनाम दिया गया है क्या जनता से वोट दिलाने का !आखिर भाजपा ऐसा क्यों समझ रही है कि बाबा जी की मोहर मारे बिना जनता उन पर भरोसा नहीं करती है !खैर,और अधिक क्या कहना किन्तु भाजपा को इतना तो सोचना ही होगा कि आम जनता को सरकारी आंकड़े समझ में नहीं आते हैं और न ही उसे अधिक दिनों तक भटकाया जा सकता है इसलिए भाजपा यदि सरकार महोत्सव मना चुकी हो तो अब उसे विजय खुमारी से बाहर निकल कर घुसना चाहिए सरकारी कार्यालयों में जहाँ कर्मचारियों की लापरवाही से त्रस्त जनता आज भी बाबुओं से गिड़गिड़ाकर अपना काम करने पर मजबूर है यही पहली सरकारों में हो रहा था तो बदल क्या है केवल बड़ी बड़ी बातें यही न ! भाजपा को ऐसी गलत फहमी क्यों है कि मनमोहन सिंह जी बोलते नहीं थे इसलिए जनता परेशान थी इसलिए हमें केवल बोलना ही चाहिए !यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि जनता जितना उनके न बोलने से परेशान थी कहीं उतना आपके अधिक बोलने से न हो जाए !अभी तक बोल बोलकर इतने वायदे किए गए हैं जिनका पूरा हो पाना कठिन ही नहीं असंभव भी है फिर भी यदि मान ही लिया जाए कि परिश्रम पूर्वक किए जा सकते हैं तो अच्छी बात है किंतु अभी तक सरकार के कार्यकाल का दशवाँ भाग बीत चुका है हालातों में कोई बदलाव नहीं है !आज भी सरकारी या निगम स्कूलों में बच्चों की भविष्य रचना पर किसी प्रकार की कोई हलचल नहीं है सरकारी चिकित्सा के क्षेत्र में भी पहले जैसी लापरवाही ही है ,डाक कर्मी उनके द्वारा हुए किसी नुक्सान की कम्प्लेन का जवाब तक देना जरूरी नहीं समझते क्यों जिम्मेदारी निभा रहे होंगे ये लोग!सरकारी फोन और इंटरनेट में जो हो जाए सो हो जाए किन्तु दूर संचार विभाग ही नहीं सरकार का हर विभाग पहले भी जिम्मेदारी मुक्त था आज भी है जिम्मेदारी किसी की नहीं है जो काम आराम आराम से हो जाए वो उसका भाग्य !बलात्कार पहले भी हो रहे थे आज भी हो रहे हैं !कुल मिलाकर देश की जनता को ये लगता ही नहीं है कि जिन सरकारी कर्मचारियों पर जनता का काम करने की जिम्मेदारी छोड़ी गई है उन्हें बेतन भी दिया जाता होगा क्योंकि काम करने का उनमें उत्साह नहीं होता है इसी उत्साह को भरने के लिए जनता धन दिखाती है जिसे देखते ही वो लहलहा उठते हैं किन्तु जिनके पास इन्हें देने को धन नहीं है वो क्या करें और इनसे कैसे कराएँ अपने जरूरी काम ?घुस का रिवाज सरकार की अकर्मण्यता से प्रारम्भ हुआ है !
मैंने सुना है कि विभिन्न आफिसों में यदि सरकार के जिम्मेदार लोग पहुंचते भी हैं तो केवल फोटो खिंचवा कर फेस बुक पर डालने के लिए उन्हें भय है कि यदि कोई काम करेंगे तो गलती होने की संभावना रहेगी ही इसलिए काम करना ही क्यों फोटो खिंचवा कर डालते रहो फेसबुक पर !
Sunday, 1 February 2015
केजरीवाल ने अपने बच्चों की और हम लोगों ने तो श्री राम जी की कसमें खाईं थीं किंतु मंदिर आज तक नहीं बना पाए !
केजरी वाल ने तो अपने बच्चों की कसम खाई थी वो भी एक बार किन्तु हमने तो प्रभु श्री राम जी की कसमें असंख्य बार खाई हैं वो भी श्री राम मंदिर बनाने के लिए! क्या हुआ उन कसमों का !यदि केजरीवाल ने बच्चों की कसम एक बार खाई थी वे इतने बड़े दोषी !तो हमने तो श्री राम जी की कसमें असंख्य बार खाई हैं है होश ! हम कितने बड़े दोषी !!
मैंने सुना है कि जिसकी झूठी कसमें खाई जाती हैं उसे पीड़ा पहुँचती है!कहीं हमारी कसमों का ही दुष्परिणाम तो नहीं है कि श्री राम लला जी चबूतरे पर पड़े शर्दी गर्मी वर्षा की कठोर पीड़ा सह रहे हैं ! दुनियाँ देख रही है हमारी श्री राम निष्ठा को !
किसके कहने पर हमने खाई थीं श्री राम जी की कसमें जरा याद करो उन्हें ! जिनके कहने पर खाई थीं वो उस पद तक पहुँच गए जहाँ पहुँचाने के लिए कसमें खाई गई थीं किंतु वो वहाँ पहुँच कर भी वहाँ नहीं पहुँच पाए जहाँ सबसे पहले पहुँचना चाहिए था किन्तु अमेरिका तक घूम आए !बेघर हुए श्री रामलला आज भी दीर्घ दीर्घायित नेत्रों से निर्निमेष बाट जोह रहे हैं उनकी ! चबूतरे पर तंबू में बैठे श्री रामलला शर्दी गर्मी वर्षा जिनके लिए सह रहे हैं उन्हें पूर्ण बहुमत दिया श्री राम भक्त जनता ने आखिर अब क्या चाह रहे हैं वे लोग !किसकी प्रतीक्षा में हैं अब वे ! श्री राम मंदिर बनाने की बात करने वाले बाबा लोग अब बच्चों की संख्या बढ़ाने की बातें कर रहे हैं अब यह बताने को कोई तैयार नहीं है कि आखिर कब बनाया जाएगा श्रीराम मंदिर !क्यों नहीं करते हैं तारीखों का ऐलान !
बंधुओ ! ऐसे ही तो अन्य सरकारें भी डर रही थीं फिर क्यों कोसा जा रहा था उन्हें ! उनके विरुद्ध क्यों चलाए जा रहे थे आंदोलन ! क्यों दी गईं गिरफ़्तारियाँ !यदि 'सत्य और श्री राम' से लगाव हो तो साहस के साथ अभी भी आगे बढ़ा जा सकता है प्रभू श्री राम क्षमा कर देंगे अन्यथा सारी चतुराई चित्त होने की कगार पर है !भगवान रक्षा करें इनकी ! जिनकी दृष्टि में श्री राम काज सबके बाद !बारे रामभक्तो !
श्री राम काज कीन्हें बिना मोहिं कहाँ विश्राम ।
इसका उद्घोष करने वाले बड़े बड़े दिग्गज आज कहाँ धमका कर बैठा दिए गए हैं !हिंदुत्व के बड़े बड़े मसीहा मौन बैठे हैं लगता है कि सबको धमका कर चुप करा दिया गया है कि खबरदार श्री राममंदिर का नाम लिया तो !तब कहा जा रहा था कि संसद में गूँजेगा 'जय श्री राम 'किन्तु सरकार बने इतने दिन बीत गए आज तक तो सुनाई नहीं दिया संसद में 'जय श्री राम 'तब कहा जा रहा था कि संसद पर फहरेगा भगवा ध्वज ! किन्तु अब तो कोई ऐसी चर्चा भी नहीं करता है !
'केजरीवाल ने बच्चों की कसम गलत खाई थी ' बच्चों की कसम उन्हें नहीं खानी चाहिए थी क्योंकि बच्चे उनके हैं और बच्चों के वे प्रिय पिता हैं , भगवान न करे बच्चों को कोई पीड़ा हो ईश्वर उनकी रक्षा करे ! किन्तु इनके हिसाब से केजरीवाल जी को कसम ही खानी थी तो उनकी खाते जिनका कोई नहीं है और जो किसी के नहीं हैं अर्थात प्रभु श्री राम जी की !उन्हें कोई पीड़ा भी होगी तो किसी को क्या लेना देना वो खुद भोगेंगे !जैसे कि हो रहा है अब !!
बंधुओ !हमसे कुछ लोग पूछते हैं कि आप किस पार्टी से जुड़े हैं क्योंकि हमें वो किसी एक पार्टी से बँधकर लिखते नहीं देखते !
मित्रो !मैं अपने ब्राह्मण धर्म का निर्वाह इस रूप में करना चाहता हूँ कि सभी जाति धर्म दलों सरकारों से जुड़े नैतिक लोगों का समर्थन करके उन्हें देश एवं धर्म के प्रति उनके दायित्व का बोध कराते रहें !फिर भी जो लोग इन दायित्वों से भटकने लगें उन्हें उसकी याद दिलाना और देश में जन जागरण करके उन्हें दायित्व निर्वाह के लिए पुनः प्रेरित करना !मेरा सोचना है कि यदि कोई राजनैतिक दल मुझे अपना नहीं समझता तो मैं किसी दल या नेता के साथ क्यों चिपका घूमूँ ये भी तो उचित नहीं है !गोपिकाओं ने उद्धव से कहा था -"माना कि कृष्ण सब कुछ अर्थात समुद्र हैं और हम कुछ नहीं अर्थात एक बूँद के समान हैं इसलिए बूँद यदि समुद्र में मिल जाती है वह भी समुद्र रूप ही हो जाएगी किंतु इसके लिए उसे अपनी पहचान अर्थात बूँदता खोनी
किन्तु हम उनसे जानना चाहते हैं कि हम किसी पार्टी से क्यों जुड़ें! अपितु उल्टा कोई पार्टी आकर हमसे क्यों न जुड़े ! अपराध ,सुरक्षा,महँगाई,भ्रष्टाचार आदि हमारे मुद्दे स्पष्ट हैं जिस भी ईमानदार दल में साहस हो वो ईमानदारी से स्वीकार करे हमारी चुनौती हम सभी देशवासी मिलकर देंगे उसका साथ !
हमारा सपना किसी को मंत्री मुख्यमंत्री प्रधान मंत्री आदि बनाना नहीं है कोई हमारा रिश्तेदार नहीं लगता है हमें तो काम प्यारा है जिसमें जनाकांक्षाओं पर खरा उतरने का साहस है सो सामने आए ! बातें बकवास बंद !सपने दिखाना बंद करो !जन हित के अभी तक जिसने जो जो काम किए हैं वो जनता की अदालत में पेश करो !जहाँ तक रही बात ये कि अभी तक कुछ नहीं किया सत्ता मिलेगी तो ये ये काम करोगे ऐसे अकर्मण्य लोग न अभीतक कुछ कर पाए और न ही आगे कर पाएँगे और सत्ता पाने के बाद तो लँगड़े लूले अपाहिज भी बहुत कुछ करने लायक हो जाते हैं क्योंकि सत्ता मिलने के बाद तो व्यक्ति गौण हो जाता है और सत्ता ही सब कुछ करती है यदि सत्ता भोगने की भावना अपने जन प्रतिनिधि में न हो तो !
भाजपा ने श्री राममंदिर बनाने का बचन दिया था इसलिए हम लोग भाजपा को सत्ता में लाने के लिए जुट गए अब यदि भाजपा इस मुद्दे को भूलती है तो राम भक्तों का कर्तव्य क्या होना चाहिए ?
केजरीवाल ने लोकपाल पास करके भ्रष्टाचार मुक्त देश बनाने का बचन दिया था यदि वो इससे भटकते हैं तो देश भक्तों का पहला दायित्व क्या होना चाहिए ?
राजनैतिक दलों की चिंता - ' केजरीवाल ने क्यों खाई बच्चों की कसम !'
केजरी वाल ने तो अपने बच्चों की कसम खाई थी वो भी एक बार किन्तु हमने तो प्रभु श्री राम जी की कसमें असंख्य बार खाई हैं वो भी श्री राम मंदिर बनाने के लिए! क्या हुआ उन कसमों का !यदि केजरीवाल ने बच्चों की कसम एक बार खाई थी वे इतने बड़े दोषी !तो हमने तो श्री राम जी की कसमें असंख्य बार खाई हैं है होश ! हम कितने बड़े दोषी !!
मैंने सुना है कि जिसकी झूठी कसमें खाई जाती हैं उसे पीड़ा पहुँचती है!कहीं हमारी कसमों का ही दुष्परिणाम तो नहीं है कि श्री राम लला जी चबूतरे पर पड़े शर्दी गर्मी वर्षा की कठोर पीड़ा सह रहे हैं ! दुनियाँ देख रही है हमारी श्री राम निष्ठा को !
किसके कहने पर हमने खाई थीं श्री राम जी की कसमें जरा याद करो उन्हें ! जिनके कहने पर खाई थीं वो उस पद तक पहुँच गए जहाँ पहुँचाने के लिए कसमें खाई गई थीं किंतु वो वहाँ पहुँच कर भी वहाँ नहीं पहुँच पाए जहाँ सबसे पहले पहुँचना चाहिए था किन्तु अमेरिका तक घूम आए !बेघर हुए श्री रामलला आज भी दीर्घ दीर्घायित नेत्रों से निर्निमेष बाट जोह रहे हैं उनकी ! चबूतरे पर तंबू में बैठे श्री रामलला शर्दी गर्मी वर्षा जिनके लिए सह रहे हैं उन्हें पूर्ण बहुमत दिया श्री राम भक्त जनता ने आखिर अब क्या चाह रहे हैं वे लोग !किसकी प्रतीक्षा में हैं अब वे ! श्री राम मंदिर बनाने की बात करने वाले बाबा लोग अब बच्चों की संख्या बढ़ाने की बातें कर रहे हैं अब यह बताने को कोई तैयार नहीं है कि आखिर कब बनाया जाएगा श्रीराम मंदिर !क्यों नहीं करते हैं तारीखों का ऐलान !
बंधुओ ! ऐसे ही तो अन्य सरकारें भी डर रही थीं फिर क्यों कोसा जा रहा था उन्हें ! उनके विरुद्ध क्यों चलाए जा रहे थे आंदोलन ! क्यों दी गईं गिरफ़्तारियाँ !यदि 'सत्य और श्री राम' से लगाव हो तो साहस के साथ अभी भी आगे बढ़ा जा सकता है प्रभू श्री राम क्षमा कर देंगे अन्यथा सारी चतुराई चित्त होने की कगार पर है !भगवान रक्षा करें इनकी ! जिनकी दृष्टि में श्री राम काज सबके बाद !बारे रामभक्तो !
श्री राम काज कीन्हें बिना मोहिं कहाँ विश्राम ।
इसका उद्घोष करने वाले बड़े बड़े दिग्गज आज कहाँ धमका कर बैठा दिए गए हैं !हिंदुत्व के बड़े बड़े मसीहा मौन बैठे हैं लगता है कि सबको धमका कर चुप करा दिया गया है कि खबरदार श्री राममंदिर का नाम लिया तो !तब कहा जा रहा था कि संसद में गूँजेगा 'जय श्री राम 'किन्तु सरकार बने इतने दिन बीत गए आज तक तो सुनाई नहीं दिया संसद में 'जय श्री राम 'तब कहा जा रहा था कि संसद पर फहरेगा भगवा ध्वज ! किन्तु अब तो कोई ऐसी चर्चा भी नहीं करता है !
'केजरीवाल ने बच्चों की कसम गलत खाई थी ' बच्चों की कसम उन्हें नहीं खानी चाहिए थी क्योंकि बच्चे उनके हैं और बच्चों के वे प्रिय पिता हैं , भगवान न करे बच्चों को कोई पीड़ा हो ईश्वर उनकी रक्षा करे ! किन्तु इनके हिसाब से केजरीवाल जी को कसम ही खानी थी तो उनकी खाते जिनका कोई नहीं है और जो किसी के नहीं हैं अर्थात प्रभु श्री राम जी की !उन्हें कोई पीड़ा भी होगी तो किसी को क्या लेना देना वो खुद भोगेंगे !जैसे कि हो रहा है अब !!
भाजपा ने श्री राममंदिर बनाने का बचन दिया था इसलिए हम लोग भाजपा को सत्ता में लाने के लिए जुट गए अब यदि भाजपा इस मुद्दे को भूलती है तो राम भक्तों का कर्तव्य क्या होना चाहिए ?
केजरीवाल ने लोकपाल पास करके भ्रष्टाचार मुक्त देश बनाने का बचन दिया था यदि वो इससे भटकते हैं तो देश भक्तों का पहला दायित्व क्या होना चाहिए ?
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